नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन और उसके दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस जांच में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले में कुछ ऐसे लोग भी शामिल पाए गए हैं जो न तो स्थानीय हैं और न ही वास्तविक श्रमिक। जांच में संकेत मिले हैं कि बाहरी तत्वों ने सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काकर हिंसा फैलाने की साजिश रची।
पुलिस ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप्स और QR कोड के माध्यम से श्रमिकों को जोड़ा गया और इन ग्रुपों में उन्हें हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के लिए उकसाया गया। अब तक इस मामले में रूपेश रॉय और मनीषा चौहान सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। जांच के दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने के भी सबूत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ X (ट्विटर) अकाउंट्स विदेश से, विशेषकर पाकिस्तान से संचालित पाए गए हैं, जिनके जरिए दंगे और फायरिंग जैसी झूठी सूचनाएं फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।
अब तक इस मामले में 13 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और कुल 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपी पहले से नोएडा में रहकर अलग-अलग स्थानों से साजिश को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल नोएडा में स्थिति सामान्य है। औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज दोबारा शुरू हो चुका है और पुलिस लगातार गश्त व फ्लैग मार्च कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध जानकारी की तुरंत सूचना दें।









