केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने इनकम टैक्स नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत टैक्स से जुड़े कुछ फॉर्म और कंप्लायंस प्रक्रिया में जरूरी संशोधन किए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स और टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए प्रक्रिया को ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाना है। आयकर विभाग नए नियमों और फॉर्म्स को चरणबद्ध तरीके से ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध करा रहा है। नए बदलावों में फॉर्म 169 और फॉर्म 171 के प्रारूप में जरूरी सुधार शामिल हैं। साथ ही संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे टैक्सपेयर्स, कंपनियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को दस्तावेज और जरूरी जानकारी तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
कम्युनिकेशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। नियम 176 में ‘डिजिटल सिग्नेचर लगाकर’ जैसी शब्दावली की जगह ‘इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के जरिए’ शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इससे आयकर विभाग और संबंधित पक्षों के बीच इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाली प्रक्रिया को नियमों में स्पष्ट किया गया है। टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किए गए हैं। इसमें कुछ पुराने प्रावधानों को हटाया गया है, जिनमें गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े उल्लेख शामिल हैं।
इसके अलावा वैल्यूअर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने वाले आवेदकों और रजिस्टर्ड इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए भी समयसीमा बढ़ाई गई है। पहले 30 सितंबर 2026 की समयसीमा थी, जिसे बढ़ाकर 31 मार्च 2027 किया गया है। वहीं, जिन टैक्सपेयर्स पर टैक्स ऑडिट लागू होता है, उनके लिए संबंधित ऑडिट प्रक्रिया और रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा का पालन करना जरूरी है। टैक्स ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट के जरिए कराया जाता है और रिपोर्ट ई-फाइलिंग सिस्टम पर अपलोड की जाती है।


