अफ्रीका के कई देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोगों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। सरकार का कहना है कि इन देशों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और पड़ोसी इलाकों में भी इसका खतरा बढ़ता जा रहा है। WHO की आपातकालीन समिति ने सदस्य देशों से एयरपोर्ट और सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने को कहा है ताकि संक्रमित या संदिग्ध यात्रियों की समय रहते पहचान हो सके।
WHO के अनुसार, 21 मई तक कांगो में 746 संदिग्ध मामले और 176 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं दोनों देशों में अब तक 85 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 10 लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण शहरी क्षेत्रों और अस्पतालों तक पहुंचने लगा है, जो हालात को और गंभीर बना सकता है।
इबोला एक खतरनाक वायरल बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। फिलहाल बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि भारत में अभी तक इस वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और एहतियाती कदम उठा रही है।









