National

भारत–फ्रांस साझेदारी: 114 राफेल से लेकर AI और सेमीकंडक्टर तक नई रणनीतिक जुगलबंदी

आज जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और दुनिया विभिन्न गुटों में विभाजित होती दिख रही है, ऐसे समय में भारत और फ्रांस के संबंध एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभरकर सामने आए हैं। वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा को केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे भविष्य की सुरक्षा और तकनीकी सहयोग की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान रक्षा, एआई, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य तकनीक जैसे क्षेत्रों में लगभग 12 नए समझौतों पर सहमति बनने की संभावना है। साथ ही 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील भी चर्चा में है, जिसमें भारत की प्रमुख मांग यह है कि उसे विमान के सोर्स कोड तक पहुंच मिले, ताकि वह अपने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों को एकीकृत कर सके।

भारत और फ्रांस के रिश्तों की नींव 1947 के बाद मजबूत हुई, लेकिन 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के समय फ्रांस द्वारा भारत का समर्थन किए जाने के बाद यह साझेदारी रणनीतिक रूप से और गहरी हो गई। 2008 के असैन्य परमाणु समझौते, 2016 की राफेल डील और 2018 के लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट ने इस रिश्ते को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता रहा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर सुरक्षा संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते हैं। रीयूनियन आइलैंड जैसे ठिकानों के कारण फ्रांस की उपस्थिति इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

2023 के ‘होराइजन 2047’ रोडमैप और 2026 के इनोवेशन ईयर ने इस साझेदारी को तकनीक और नवाचार की दिशा में और मजबूत किया है। यह संबंध अब केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहकर वैश्विक तकनीकी और रणनीतिक सहयोग का एक प्रमुख आधार बनता जा रहा है।