हरियाणा सरकार ने ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (हरियाणा) रूल्स 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें श्रम कानूनों को एकीकृत कर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। नए नियमों के तहत ग्रेच्युटी भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन कर्मचारी, नामित व्यक्ति या कानूनी वारिस द्वारा ऑनलाइन या स्पीड पोस्ट से किया जा सकेगा।
ड्राफ्ट में सबसे बड़ा बदलाव फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को लेकर है। अब एक वर्ष की सेवा पूरी करने वाले ऐसे कर्मचारी ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। साथ ही छह महीने से अधिक की अतिरिक्त सेवा को एक अतिरिक्त वर्ष माना जाएगा। हालांकि मेडिकल खर्च प्रतिपूर्ति, स्टॉक ऑप्शन, क्रेच अलाउंस, इंटरनेट-टेलीफोन रिइंबर्समेंट और मील वाउचर को वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
ग्रेच्युटी के लिए आवेदन देय होने के 30 दिनों के भीतर करना होगा। सरकार ने मसौदे पर 45 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह नियम केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत लागू किए जा रहे हैं, जिसे नवंबर 2025 की अधिसूचना के बाद प्रभावी किया गया था।
नए नियम लागू होने पर हरियाणा मैटरनिटी बेनिफिट रूल्स 1967, ग्रेच्युटी रूल्स 1972 और अन्य कई पुराने श्रम नियम समाप्त हो जाएंगे। औद्योगिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण अब श्रम विभाग के पोर्टल पर होगा, जिसे 7 दिन में मंजूरी मिलेगी, अन्यथा ऑटो अप्रूवल माना जाएगा। 24 महीने तक अनुपालन न करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है।
मातृत्व लाभ मामलों की अपील डिप्टी लेबर कमिश्नर के पास जाएगी। मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान है। नियोक्ताओं को रिक्तियों की जानकारी 15 दिन पहले पोर्टल पर देनी होगी और सभी रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे। महिलाओं के लिए अलग रजिस्टर रखना भी अनिवार्य होगा।









