देश की राजनीति अब सिर्फ रैलियों और जनसभाओं तक सीमित नहीं रही, सोशल मीडिया भी सियासी ताकत का बड़ा पैमाना बन चुका है। केंद्र सरकार ने 1 मई से 15 अगस्त 2026 के बीच नेताओं की डिजिटल गतिविधियों का आकलन करते हुए सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदर्शन के मामले में पहले स्थान पर बताए गए हैं। इस आकलन में सिर्फ पोस्ट की संख्या नहीं, बल्कि लाइक्स, फॉलोअर्स, एंगेजमेंट और कंटेंट की पहुंच जैसे मानकों को भी शामिल किया गया। Instagram, X, Facebook और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर नेताओं की सक्रियता का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पीएम मोदी के अलावा अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और नितिन गडकरी जैसे नेता प्रमुख प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे, जबकि सांसद कंगना रनौत भी डिजिटल सक्रियता में प्रमुख चेहरों में रहीं।
विपक्ष की डिजिटल ताकत को भी इस आकलन में जगह मिली। राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता सोशल मीडिया पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विपक्षी चेहरों में बताए गए हैं। यानी राजनीतिक मुकाबला अब चुनावी मैदान के साथ-साथ मोबाइल स्क्रीन पर भी तेजी से बढ़ रहा है। खास बात यह है कि सरकार अब Gen-Z और युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल रणनीति बदलने पर जोर दे रही है। लंबे राजनीतिक संदेशों की जगह शॉर्ट वीडियो, रील्स, क्रिएटर आधारित कंटेंट और अनौपचारिक संवाद को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ केंद्रीय मंत्रियों के विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से सीधे संवाद करने की योजना पर भी जोर है। यानी आने वाले समय में राजनीति का नया मंत्र साफ दिखाई दे रहा है—जो जनता की स्क्रीन पर ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचेगा, वही राजनीतिक संवाद में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकेगा।


