भारत का पासपोर्ट ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (Global Passport Index 2026) में इस वर्ष 197 देशों की सूची में 125वें स्थान पर रहा है। पिछले साल भारत 124वें स्थान पर था, यानी इस बार एक पायदान की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2021 के मुकाबले भारतीय पासपोर्ट की स्थिति में सुधार देखने को मिला है और उसका समग्र स्कोर बढ़कर 45.1 हो गया है, जो पिछले पांच वर्षों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।
ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस (GCS) द्वारा जारी यह इंडेक्स अन्य पारंपरिक पासपोर्ट रैंकिंग से अलग है। इसमें केवल वीज़ा-फ्री यात्रा को ही आधार नहीं बनाया जाता, बल्कि पासपोर्ट की वैश्विक उपयोगिता, निवेश की संभावनाओं और जीवन की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मानकों को भी शामिल किया जाता है। कुल स्कोर में 50 प्रतिशत वेटेज ग्लोबल मोबिलिटी, जबकि 25-25 प्रतिशत निवेश क्षमता और क्वालिटी ऑफ लिविंग को दिया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पासपोर्ट धारकों को 26 देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। इनमें भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस जैसे देश शामिल हैं। वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई प्रमुख देशों की यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को अभी भी पहले से वीज़ा लेना आवश्यक है।
इंडेक्स के अलग-अलग मानकों में भारत की स्थिति मिश्रित रही। एन्हांस्ड मोबिलिटी इंडेक्स में भारत 136वें स्थान पर रहा, जबकि क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स में 11 स्थान की छलांग लगाकर 118वें स्थान पर पहुंच गया। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट इंडेक्स में भी भारत ने सुधार करते हुए 97वें से 94वें स्थान पर जगह बनाई। इस वर्ष स्वीडन को दुनिया का सबसे मजबूत पासपोर्ट घोषित किया गया। उसके बाद स्विट्ज़रलैंड, फ़िनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे और सिंगापुर शीर्ष 10 देशों में शामिल रहे।


