Delhi

प्रदूषण के खिलाफ एक्शन मोड में दिल्ली सरकार: PUC सेंटर ब्लैकलिस्ट, 100% DTC बसें और पहला ई-वेस्ट पार्क जल्द

दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई ठोस और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार का फोकस अब अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान पर है।

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब GRAP-4 हटने के बाद भी “नो PUC, नो फ्यूल” का नियम लागू रहेगा। यानी प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं मिलेगा। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले 12 PUC केंद्रों को नोटिस भेजकर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और उनकी जगह नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे। किसी भी तरह की गड़बड़ी को अब आपराधिक कृत्य माना जाएगा।

परिवहन क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। DEMS से जुड़ी कई बसों को हटाकर 100% DTC मॉडल अपनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे ड्राइवरों और कंडक्टरों को स्थायी रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, चार नए ऑटोमैटिक व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन को मंजूरी दी गई है, जिससे वाहनों की जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी कार्रवाई तेज की गई है। हाईराइज इमारतों के आसपास धूल नियंत्रण के लिए मिस्ट सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है। वहीं, नियमों का पालन न करने वाली 800 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को DPCC और MCD द्वारा सील किया जा चुका है।

दिल्ली में जल्द ही पहला ई-वेस्ट प्रोसेसिंग पार्क स्थापित किया जाएगा, जो शून्य अपशिष्ट और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप काम करेगा। साथ ही, राजधानी के एक हजार से अधिक जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का मानना है कि ये कदम मिलकर दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।