हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा गतिरोध सामने आया है, जहां Indian Medical Association ने आयुष्मान भारत योजना के तहत लंबित भुगतान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार, ‘चिरायु हरियाणा’ योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों का करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है, जिससे प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य के लगभग 700 निजी अस्पतालों का कहना है कि उनके क्लेम कई महीनों से लंबित हैं। वहीं सरकार ने भुगतान जारी करने से पहले बिलों की गहन जांच (ऑडिट) के आदेश दिए हैं, ताकि किसी भी वित्तीय अनियमितता को रोका जा सके। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि वे जांच के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जांच के नाम पर भुगतान में देरी से अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।
IMA हरियाणा इकाई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो प्रदेश के निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद कर सकते हैं। इस स्थिति का सीधा असर लाखों मरीजों पर पड़ेगा, जो इस योजना पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर निजी अस्पताल सेवाएं बंद करते हैं तो डायलिसिस और कीमोथेरेपी जैसे जरूरी इलाज प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा और आपात स्थिति में मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और IMA के बीच बातचीत जारी है, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है कि वह जांच और भुगतान के बीच संतुलन बनाकर इस संभावित स्वास्थ्य संकट को कैसे टालती है।









