कर्नाटक सरकार ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इंजीनियरिंग, मेडिकल समेत व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रमों में 7 %आरक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री ने 71वें कन्नड़ राज्योत्सव समारोह के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंचायत स्तर पर संचालित स्कूलों को शहरी विद्यालयों के समान सुविधाओं और शैक्षणिक स्तर पर विकसित करने के लिए काम कर रही है। इसके तहत 15,000 शिक्षकों की भर्ती के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, राज्यभर में 25,498 द्विभाषी स्कूल शुरू किए जा चुके हैं और 250 सरकारी विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
शिवकुमार ने बताया कि विद्यार्थियों को कक्षा छह से ही कौशल आधारित शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही इसी कक्षा से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है, जो कक्षा 12 तक जारी रहेगा। सरकारी स्कूलों के विकास के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि का भी उपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ खेल, कला और साहित्य में भी रुचि लेने की अपील की। उन्होंने कन्नड़ भाषा के संरक्षण और प्रचार पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के साथ अपनी मातृभाषा को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए रखना जरूरी है। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा खिलाड़ियों को पदक के आधार पर नकद पुरस्कार देने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।


