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NALSAR विवाद पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान, बोले- मैंने दीक्षांत समारोह का निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया

NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के आगामी दीक्षांत समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने का निमंत्रण उन्होंने स्वीकार ही नहीं किया था। ऐसे में उनके समारोह में शामिल होने या नहीं होने को लेकर विवाद खड़ा करने का कोई आधार नहीं है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और शिक्षकों को पत्र लिखकर CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। छात्रों के एक समूह ने आगामी दीक्षांत समारोह में उनकी मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी।

बताया जा रहा है कि NALSAR प्रशासन ने अपनी परंपरा के तहत अगस्त के अंत या सितंबर में होने वाले दीक्षांत समारोह के लिए CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस निमंत्रण को कभी स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि जब उन्होंने समारोह में शामिल होने की सहमति ही नहीं दी, तो इस मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है। मामला उस समय और गंभीर हो गया था, जब छात्रों के विरोध के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 2026 में पासआउट होने वाले छात्रों के रजिस्ट्रेशन को लेकर हस्तक्षेप किया। हालांकि, बाद में BCI ने अपने फैसले पर यू-टर्न लेते हुए छात्रों से माफी मांगी और रजिस्ट्रेशन रोकने का आदेश वापस ले लिया। जोधपुर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करने के कुछ घंटे बाद CJI सूर्यकांत ने मीडिया से बातचीत में NALSAR विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में उनके नाम को लेकर विवाद को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।