एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट से जुड़ी घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) पायलटों की ड्रग टेस्टिंग व्यवस्था को और सख्त करने पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित बदलाव के तहत प्रत्येक पायलट का साल में कम से कम एक बार अचानक यानी रैंडम ड्रग टेस्ट कराया जा सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में पूरे पायलट नेटवर्क के करीब 10 प्रतिशत पायलटों की ड्रग टेस्टिंग की जाती है। अब DGCA इस दायरे को बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रहा है, ताकि किसी भी पायलट को बिना पूर्व सूचना के जांच के लिए चुना जा सके।
मंत्री ने बताया कि DGCA इस प्रस्ताव को लेकर एयरलाइंस और अन्य संबंधित स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर रहा है। हालांकि, सभी पायलटों की सालाना रैंडम टेस्टिंग लागू करने से एयरलाइंस के संचालन और पायलटों की उपलब्धता पर असर पड़ने की संभावना भी है। इसलिए सुरक्षा जरूरतों और व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने पर विचार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव एयर इंडिया की घटना की जांच के बीच सामने आया है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) मामले की जांच कर रहा है। सरकार के अनुसार, विमान और डेटा रिकॉर्डर सुरक्षित हैं और जांच से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। फिलहाल रैंडम ड्रग टेस्टिंग का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसे अंतिम नियम नहीं माना गया है।


