चेन्नई शहर में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) ने घर से लेकर व्यावसायिक संस्थानों तक कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य कर दिया है। अब लोगों को गीले और सूखे कचरे के लिए इस्तेमाल होने वाले दो डस्टबिन के बजाय हरे, नीले, लाल और काले रंग के चार अलग-अलग डिब्बे रखने होंगे। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना और नगरपालिका कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
नए सिस्टम के तहत हरे डस्टबिन में भोजन के अवशेष, सब्जियों के छिलके और अन्य गीला कचरा डाला जाएगा। नीले डिब्बे में रिसाइकिल होने वाला सूखा कचरा रखा जाएगा। लाल डस्टबिन सैनिटरी कचरे के लिए होगा, जिसमें इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी नैपकिन शामिल हैं। इन्हें सुरक्षित तरीके से लपेटकर डालना होगा। वहीं, काले डिब्बे में बैटरी, बल्ब, ई-वेस्ट, एक्सपायर्ड दवाएं और अन्य घरेलू खतरनाक कचरा डाला जाएगा।
यह नियम निजी घरों, अपार्टमेंट, दुकानों, स्कूल-कॉलेज, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक संस्थानों और अधिक मात्रा में कचरा पैदा करने वाली इकाइयों पर लागू होगा। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए इस्तेमाल होने वाले बैटरी चालित वाहनों में भी चार अलग-अलग रंगों के कंटेनर लगाए जा रहे हैं।
GCC के मुताबिक, सफाई कर्मचारियों को स्रोत पर सही तरीके से अलग किया गया कचरा ही लेने के निर्देश दिए गए हैं। निगम का कहना है कि इस व्यवस्था से रिसाइकिलिंग बढ़ेगी, जैविक कचरे से खाद बनाना आसान होगा और लैंडफिल पर दबाव कम होगा।


