भारत सैन्य विमानन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण तकनीक को स्वदेशी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग पॉड (ARP) विकसित करने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया है। यह परियोजना Technology Development Fund के तहत शुरू की गई है।
प्रस्तावित सिस्टम की मदद से लड़ाकू विमानों में उड़ान के दौरान ही ईंधन भरा जा सकेगा। इसे मॉड्यूलर डिजाइन के साथ विकसित करने की योजना है। एक टैंकर विमान पर अधिकतम तीन रिफ्यूलिंग पॉड लगाए जा सकेंगे—दो पंखों पर और जरूरत के अनुसार एक फ्यूजलेज पर। पूरी प्रक्रिया को विमान के भीतर मौजूद टेक्नीशियन कंट्रोल स्टेशन से संचालित किया जाएगा।
DRDO के अनुसार, सिस्टम को करीब 10,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई पर विभिन्न परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। इसकी अधिकतम ईंधन ट्रांसफर क्षमता 2,000 अमेरिकी गैलन प्रति मिनट तक रखने का लक्ष्य है। इसमें होज-एंड-ड्रोग तकनीक का इस्तेमाल होगा।
इस तकनीक से भविष्य में C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलस जैसे परिवहन विमानों को सहायक टैंकर की भूमिका में इस्तेमाल करने का विकल्प मिल सकता है। इससे लंबी दूरी के मिशन और एयर पेट्रोलिंग के दौरान विमानों की उड़ान अवधि बढ़ाई जा सकेगी। भारत वर्तमान में IL-78 टैंकरों का इस्तेमाल करता है। स्वदेशी रिफ्यूलिंग पॉड इस क्षमता को मजबूत करने के साथ विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने में भी मदद कर सकता है।


