देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि बाजार में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है। संगठन के मुताबिक, कम उत्पादन, जमाखोरी और सट्टेबाजी के चलते कीमतों में तेजी आई है। हालांकि, आने वाले दिनों में सप्लाई बढ़ने से खुदरा कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 20 फीसदी बढ़कर 56 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। ISMA के अनुसार, मौसम संबंधी कारणों से उत्पादन प्रभावित हुआ, लेकिन आगामी त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। इसमें बड़ी हिस्सेदारी ब्राजील से आने की संभावना है। समुद्री रास्ते से चीनी की खेप भारत पहुंचने में करीब 40-45 दिन लग सकते हैं और पहली खेप अक्टूबर के मध्य से पहले आने की उम्मीद है। 2025-26 सीजन में नेट चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसमें लगभग 24 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल की गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुकूल नहीं रहने से भारत अपने 20 लाख टन के निर्यात कोटे में से केवल 8 लाख टन चीनी ही निर्यात कर सका। ब्राजील से आने वाली रॉ शुगर को रिफाइनरियों और चीनी मिलों में प्रोसेस करके सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा, जिसके बाद इसे घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।


