महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में अहम बनता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार अगले दो से तीन सप्ताह में संसद का विशेष या विस्तारित सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। चर्चा है कि करीब 15 सितंबर के आसपास सदन की बैठक हो सकती है, हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि सरकार की प्राथमिकता केवल संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करना नहीं, बल्कि उसे पारित कराने के लिए जरूरी राजनीतिक समर्थन जुटाना है। संविधान संशोधन के लिए अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, ऐसे में संख्या बल सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुका है, लेकिन अभी राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उसी सत्र को आगे बढ़ाकर दोबारा बैठक बुलाने का रास्ता खुला हुआ है। महिला आरक्षण और परिसीमन को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है। महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है। परिसीमन में जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को छोड़कर अन्य दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। क्षेत्रीय और छोटे दल इस गणित में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सरकार की संभावित रणनीति साफ है-पहले समर्थन का भरोसा, फिर संसद में विधेयक। पर्याप्त संख्या सुनिश्चित होने के बाद ही सत्र बुलाने और संविधान संशोधन आगे बढ़ाने का फैसला किए जाने की संभावना है।


