धार की बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को शुक्रवार की नमाज़ के लिए मुस्लिम पक्ष को विवादित परिसर से सटी उपयुक्त जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि खसरा नंबर 596-611, जिसे रिकॉर्ड में ‘दरगाह भूमि’ के रूप में दर्ज किया गया है, नमाज़ के लिए उपयुक्त स्थान प्रतीत होता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक इस स्थान पर नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में दोनों पक्ष आपसी सहमति से किसी अन्य स्थान पर सहमत होते हैं, तो उसके लिए भी रास्ता खुला रहेगा। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य केवल शांति बनाए रखने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि सभी नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना भी उसका संवैधानिक दायित्व है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत को बताया कि प्रशासन उन्हें नमाज़ के लिए करीब 1.3 किलोमीटर दूर स्थान देने का प्रस्ताव दे रहा था, जो व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि वैकल्पिक स्थान ऐसा हो, जहां से मस्जिद स्पष्ट दिखाई दे। सुनवाई के दौरान उन्होंने गूगल मैप के जरिए अदालत को पूरे क्षेत्र की स्थिति भी समझाई।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि खसरा नंबर 596-611 सबसे उपयुक्त विकल्प है। अदालत ने कहा कि इस स्थान का प्रवेश और निकास मार्ग अलग है, जिससे पूजा और नमाज़ के दौरान दोनों समुदायों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी आसानी होगी। इसके बाद कोर्ट ने प्रशासन को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


