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लिफ्ट हादसे में मौत हुई तो कौन होगा जिम्मेदार? सुप्रीम कोर्ट ने तय की जवाबदेही

लिफ्ट आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। मॉल, अस्पताल, ऑफिस, होटल और बड़ी रिहायशी इमारतों में हर दिन लाखों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब लिफ्ट में तकनीकी खराबी आ जाए और उसकी वजह से कोई गंभीर हादसा हो जाए, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लिफ्ट बनाने और उसका रखरखाव करने वाली कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी कंपनियों पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की विशेष कानूनी जिम्मेदारी होती है। यदि समय पर जांच, मरम्मत या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता और उसकी वजह से दुर्घटना होती है, तो कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यह फैसला वर्ष 2003 में नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित RAW कार्यालय में हुए लिफ्ट हादसे से जुड़ा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी विपिन हांडा की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि संबंधित लिफ्ट पहले भी कई बार खराब हो चुकी थी, वोल्टेज की समस्या की जानकारी भी थी और रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने OTIS Elevator (India) Ltd. को 70 प्रतिशत, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) को 25 प्रतिशत और RAW को 5 प्रतिशत जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित परिवार को ब्याज सहित ₹3.01 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

अदालत ने कहा कि लिफ्ट जैसी मशीनों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यह फैसला आम लोगों के अधिकारों को मजबूत करता है और साफ संदेश देता है कि यदि लापरवाही के कारण लिफ्ट हादसा होता है, तो संबंधित कंपनी और भवन प्रबंधन दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पीड़ित या उनके परिजन पुलिस, उपभोक्ता आयोग या अदालत का दरवाजा खटखटाकर न्याय और मुआवजे की मांग कर सकते हैं।