अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले FIH हॉकी वर्ल्ड कप से पहले हॉकी इंडिया ने भारतीय पुरुष और महिला टीमों की नई जर्सी लॉन्च कर दी है। इस बार टीम अपनी पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की जर्सी में मैदान पर उतरेगी। यह फैसला सामने आते ही खेल जगत में बहस शुरू हो गई है। वर्ल्ड कप 15 से 30 अगस्त तक आयोजित होगा।
हॉकी इंडिया के मुताबिक नई जर्सी का डिजाइन भारत की संस्कृति, विरासत और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। संस्था का कहना है कि केसरिया रंग साहस, त्याग और विजय का प्रतीक है, जबकि इसका डिजाइन भारतीय तिरंगे और उगते सूरज से प्रेरित है। जर्सी में मंडला शैली के पैटर्न, अशोक चक्र से प्रेरित ग्राफिक्स, सुदर्शन चक्र की आधुनिक आकृति और तिरंगे रंग की डिटेलिंग शामिल की गई है। वहीं, “INDIA” शब्द को देवनागरी शैली से प्रेरित विशेष फॉन्ट में लिखा गया है। टीम के पास इसी डिजाइन वाली सफेद वैकल्पिक जर्सी भी रहेगी।
हालांकि, भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान वर्षों से नीली जर्सी रही है और खिलाड़ी व प्रशंसक उसी रंग से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। उनके मुताबिक मुख्य जर्सी का रंग बदलने का तर्क स्पष्ट नहीं है। वहीं, हॉकी इंडिया ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि केसरिया रंग तिरंगे का अभिन्न हिस्सा है और इसमें कुछ भी विवादित नहीं है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि नीले हॉकी टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से खिलाड़ियों की दृश्यता कम हो जाती है, जबकि केसरिया रंग बेहतर कंट्रास्ट देता है। संस्था का मानना है कि नई जर्सी आधुनिक सोच, भारतीय पहचान और बेहतर दृश्य अनुभव का प्रतीक बनेगी।


