पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए नया फीस रेगुलेशन कानून लागू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को घोषणा की कि पिछले तीन वर्षों में निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को एक महीने के भीतर वापस करनी होगी।
सरकार के अनुसार, हर जिले में उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में फीस रेगुलेटरी कमेटी गठित की जाएगी। यह समिति स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और फीस से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी। यदि किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन किया तो पहली बार 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फीस वृद्धि की गणना हर वर्ष बढ़ी हुई मूल फीस के आधार पर होगी। यदि किसी स्कूल ने तीन वर्षों में अनुमेय सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि अभिभावकों के बैंक खातों में सीधे लौटानी होगी। इसे अगले शैक्षणिक सत्र की फीस में समायोजित करने की अनुमति नहीं होगी।
नए कानून में फीस की स्पष्ट परिभाषा भी तय की गई है। अभिभावकों से अनिवार्य रूप से लिया जाने वाला हर भुगतान फीस माना जाएगा। केवल स्वैच्छिक गतिविधियों, जैसे शैक्षणिक भ्रमण या विशेष कार्यक्रमों के लिए लिया गया शुल्क इसके दायरे से बाहर रहेगा।
सरकार ने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस कम दिखाकर ट्रांसपोर्ट, बिल्डिंग, कंप्यूटर और अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूलते हैं। इसे रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर स्कूलों के खातों की फोरेंसिक ऑडिट भी कराई जाएगी। इसके अलावा जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना और वित्तीय विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से राज्य के करीब 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 32 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।


