सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रस्तावित CAG ऑडिट पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद अगली सुनवाई तक ऑडिट प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली सरकार ने एक दिन पहले ही डिस्कॉम के खातों की CAG से जांच कराने का आदेश जारी किया था।
मामला दिल्ली की तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों—बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL)—से जुड़ा है। इन कंपनियों पर लगभग 38,500 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स (RA) का बकाया बताया जा रहा है, जिसकी जांच के लिए सरकार ने CAG ऑडिट का फैसला लिया था।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनियों की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने CAG ऑडिट का विरोध किया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने ऑडिट प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, लेकिन डिस्कॉम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें फिलहाल राहत मिल गई।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि इस मामले में यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है कि क्या निजी बिजली वितरण कंपनियों का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा कराया जा सकता है। इसी वजह से अदालत ने फिलहाल ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का निर्णय लिया है।
इस दौरान दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की अपील पर भी सुनवाई हुई। आयोग का तर्क है कि निजी डिस्कॉम के ऑडिट के लिए CAG की नियुक्ति मौजूदा वैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं है। DERC का कहना है कि नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति की जानी चाहिए। अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में आगे की दिशा तय होगी।


