नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और संविधान संशोधन प्रस्तावों को सदन में पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष भी महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सत्र के दौरान लोकसभा की राजनीतिक तस्वीर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। विभिन्न क्षेत्रीय दलों में हुए घटनाक्रमों के चलते कुछ सांसदों के दल बदल और उनके बैठने की व्यवस्था को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के फैसलों पर सभी की नजर रहेगी। टीएमसी और शिवसेना से जुड़े मामलों में स्पीकर का निर्णय सत्र की शुरुआत से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकता है।
विधायी एजेंडे की बात करें तो सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण बिलों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके अलावा ‘एक देश, एक चुनाव’ से संबंधित प्रस्ताव, एफसीआरए संशोधन विधेयक, एंटी डोपिंग बिल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, न्यायपालिका से जुड़े सुधार, कॉर्पोरेट कानून और सिक्योरिटीज मार्केट से संबंधित विधेयकों पर भी चर्चा होने की संभावना है। लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव भी इस सत्र का प्रमुख आकर्षण बन सकते हैं।
वहीं विपक्ष मानसून की अनियमितता से उत्पन्न सूखा और बाढ़ की स्थिति, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें, बेरोजगारी, नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा मामले और मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। राजनीतिक दलों में टूट और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। ऐसे में आगामी मॉनसून सत्र के दौरान संसद में तीखे राजनीतिक टकराव और अहम विधायी फैसलों की संभावना जताई जा रही है।


