Uttar Pradesh

राम मंदिर दान घोटाला: आरोपी का सनसनीखेज दावा, बाथरूम में छिपाए जाते थे करोड़ों रुपये

अयोध्या के राम मंदिर दान गबन मामले की जांच में नया मोड़ सामने आया है। गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने पुलिस पूछताछ के दौरान कथित तौर पर कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने स्वीकार किया कि दान की रकम को मंदिर परिसर से बाहर ले जाने से पहले कुछ समय के लिए बाथरूम में छिपाया जाता था, ताकि किसी को शक न हो और मौका मिलने पर उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

बताया जा रहा है कि अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उसने कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन और पूरी कार्यप्रणाली की जानकारी दी। आरोपी का दावा है कि चोरी सुनियोजित तरीके से की जाती थी। एक व्यक्ति नकदी निकालता था, जबकि अन्य लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर गतिविधि को छिपाने का काम करते थे। आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन की पूरी जानकारी थी, जिसका फायदा उठाकर वे निगरानी से बचते थे।

पूछताछ में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ नाम भी सामने आए हैं। आरोपी ने दावा किया कि दान की गिनती की व्यवस्था में कुछ जिम्मेदार लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने यह भी बताया कि दान गिनती कक्ष की एक चाबी एक सहयोगी के पास और दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास रहती थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी की रकम का उपयोग जमीन और मकान खरीदने जैसे निवेश में किया गया। अब जांच एजेंसियां आरोपियों की संपत्तियों और बैंक लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। इससे पहले ट्रस्ट ने 5 जून को एक आरोपी के घर से 58 लाख रुपये बरामद किए थे, जबकि शेष राशि बैंक ट्रांसफर के माध्यम से वापस लौटाई गई थी। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि कथित गबन कितने समय से चल रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।