आज बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, शॉपिंग, टिकट बुकिंग और मनोरंजन जैसे ज्यादातर काम मोबाइल ऐप्स के जरिए आसानी से हो जाते हैं। लेकिन ऐप्स पर बढ़ती निर्भरता के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ रहा है। ये ऐप देखने में बिल्कुल असली लग सकते हैं, लेकिन इन्हें इंस्टॉल करने पर निजी डेटा चोरी, फोन की सुरक्षा में सेंध और आर्थिक नुकसान का खतरा रहता है।
डाउनलोड से पहले रिव्यू और रेटिंग देखें: किसी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके डाउनलोड और यूजर रिव्यू जरूर पढ़ें। अगर लोग डेटा चोरी, अत्यधिक विज्ञापनों या संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत कर रहे हैं, तो ऐसे ऐप से दूरी बनाना बेहतर है।
रिलीज डेट और डेवलपर की जांच करें: लोकप्रिय ऐप के नाम से मिलते-जुलते नए ऐप्स से सावधान रहें। डेवलपर का नाम कंपनी की आधिकारिक जानकारी से मिलाएं। स्पेलिंग में गलती या संदिग्ध डेवलपर नाम खतरे का संकेत हो सकता है।
परमिशन पर दें खास ध्यान: ऐप को उतनी ही परमिशन दें, जितनी उसके काम के लिए जरूरी हो। किसी साधारण ऐप का बिना वजह कॉन्टैक्ट, माइक्रोफोन या लोकेशन का एक्सेस मांगना संदेह पैदा कर सकता है।
नाम, आइकन और डिस्क्रिप्शन जांचें: फर्जी ऐप अक्सर असली ऐप के नाम और लोगो की नकल करते हैं। इसलिए केवल आइकन देखकर डाउनलोड न करें। ऐप का विवरण और स्क्रीनशॉट भी ध्यान से देखें।
आधिकारिक वेबसाइट से करें पुष्टि: बैंक, शॉपिंग प्लेटफॉर्म या किसी कंपनी का ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऐप का लिंक जरूर जांचें। अनजान मैसेज या वेबसाइट से मिले लिंक के जरिए ऐप डाउनलोड करने से बचें। अगर गलती से कोई संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए, तो उसे तुरंत हटाएं और डिवाइस की सुरक्षा जांच करें। बैंकिंग या पेमेंट ऐप से जुड़ी जानकारी कभी भी संदिग्ध ऐप में दर्ज न करें। Android में Google Play Protect की मदद से भी संभावित खतरनाक ऐप्स की जांच की जा सकती है।


