सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेश संबंधी कंटेंट पर निगरानी कड़ी करने का प्रस्ताव रखा है। YouTube, Instagram, Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय बड़े इन्फ्लुएंसर अब SEBI की नई परिभाषा के तहत ‘सेलिब्रिटी’ माने जा सकते हैं, यदि उनके किसी भी एक प्लेटफॉर्म पर 5 लाख या उससे अधिक फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर हैं। SEBI का यह नियम विशेष रूप से उन लोगों पर लागू होगा जो शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, IPO, स्टॉक या अन्य वित्तीय उत्पादों से जुड़ा कंटेंट बनाते या प्रचार करते हैं। इसके तहत ऐसे इन्फ्लुएंसर किसी भी वित्तीय उत्पाद का सीधा समर्थन या गारंटीड रिटर्न का दावा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, वे SEBI-रेगुलेटेड कंपनियों के सामान्य ब्रांड प्रचार में शामिल हो सकते हैं।
23 जून 2026 को SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें Common Advertisement Code (CAC) लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस पर 14 जुलाई 2026 तक जनता और संबंधित संस्थाओं से सुझाव मांगे गए हैं। यह नियम ब्रोकर, म्यूचुअल फंड, निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट जैसे सभी वित्तीय मध्यस्थों पर समान रूप से लागू होगा। ‘सेलिब्रिटी’ की परिभाषा केवल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें अंतरराष्ट्रीय खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी, टीवी शो होस्ट, रियलिटी शो विजेता और ओटीटी प्रतियोगिताओं के प्रतिभागी भी शामिल होंगे। यहां तक कि एआई आधारित डिजिटल अवतार और वर्चुअल इन्फ्लुएंसर भी इस दायरे में आ सकते हैं, यदि वे दर्शकों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।SEBI ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय विज्ञापनों में भ्रामक दावे, गारंटीड रिटर्न, गलत तुलना या निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन जैसी बातें पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। इसका उद्देश्य निवेशकों को गलत जानकारी से बचाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।


