भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए सिक्योरिटीज ट्रांसफर प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उसके शेयर, बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज को नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी। दस्तावेजों की संख्या कम की गई है और क्लेम की सीमा भी बढ़ा दी गई है।
सेबी ने छोटे दावों के त्वरित निपटारे के लिए “क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग” (QTP) नामक नई व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत फिजिकल रूप में रखी गई सिक्योरिटीज के 10 हजार रुपये तक और डीमैट खाते में मौजूद सिक्योरिटीज के 30 हजार रुपये तक के दावों का निपटारा तेज़ी से किया जाएगा। इससे नॉमिनी और उत्तराधिकारियों को लंबी और जटिल प्रक्रिया से राहत मिलेगी। नियामक ने सरलीकृत दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत क्लेम की सीमा भी दोगुनी कर दी है।
अब फिजिकल सिक्योरिटीज के मामले में प्रति सूचीबद्ध कंपनी सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि डीमैट सिक्योरिटीज के लिए यह सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है। प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए सेबी ने पैन कार्ड जमा कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। साथ ही बदलते उत्तराधिकार कानूनों को ध्यान में रखते हुए वसीयत (विल) के सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। इससे परिवारों को अतिरिक्त दस्तावेजी औपचारिकताओं से राहत मिलेगी।
दावों के सत्यापन को आसान बनाने के लिए अब क्यूआर कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्रों की प्रतियां भी स्वीकार की जाएंगी। वहीं विदेशों में जारी मृत्यु प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं और संबद्ध विदेशी बैंकों के माध्यम से अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, सेबी ने अपने बोर्ड सदस्यों और कर्मचारियों के लिए हितों के टकराव, पारदर्शिता और खुलासे से जुड़े नियमों को भी और मजबूत करने का फैसला किया है। सेबी का कहना है कि ये बदलाव निवेशकों के हितों की रक्षा करने, प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और उत्तराधिकारियों को समय पर राहत पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।









