NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में हुए विरोध और राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार सार्वजनिक मंच से विस्तार से बात की। भुवनेश्वर स्थित जीएम विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भ्रमित करने की कोशिश की गई और देशहित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया।
प्रधान ने कहा कि देश की युवा आबादी भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले दस वर्षों में करोड़ों युवा देश की आबादी का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं युवाओं की मेहनत और उनकी आकांक्षाएं भारत को आने वाले समय में विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके मुताबिक, उनके लिए कोई भी राजनीतिक पद या सत्ता देश और बच्चों के भविष्य से बड़ा नहीं है।
ओडिशा में विरोध पर दिया जवाब
धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान बीजेडी कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारेबाजी की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधान ने कहा कि वे इस तरह के विरोध से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि विरोध करने वाले उन्हें वापस जाने के लिए कह सकते हैं, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
नवीन पटनायक पर साधा निशाना
प्रधान ने बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक पर युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें ओडिशा के लिए कलंक और खराब व्यक्ति बताया जाता है, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे राज्य को शर्मिंदा होना पड़े। इस दौरान मंच पर बीजेडी विधायक और उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे। प्रधान ने कहा कि इस्तीफे की घोषणा के समय भी उन्होंने यही स्पष्ट किया था कि नई पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिशों के बीच देश और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देना उनके लिए सबसे जरूरी है।


