चीन के शंघाई में आयोजित 28वें शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (SIFF) में भारतीय सिनेमा ने एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव में भारत की भागीदारी ने वैश्विक मंच पर बॉलीवुड और भारतीय फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित किया है। शंघाई स्थित भारत के महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने एशियन फिल्म रेट्रोस्पेक्टिव के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेते हुए कहा कि सिनेमा विभिन्न संस्कृतियों और समाजों के बीच संवाद और समझ बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है।
फेस्टिवल के 28वें संस्करण में शंघाई के 47 सिनेमाघरों में 420 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐतिहासिक थिएटरों और आधुनिक सांस्कृतिक गतिविधियों के अनूठे संगम ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया है। भारतीय फिल्मों को चीन समेत दुनिया भर के दर्शकों से लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो भारतीय सिनेमा की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है। महावाणिज्यदूत प्रतीक माथुर ने कहा कि भारतीय फिल्में साझा भावनाओं, मूल्यों और कहानियों के माध्यम से सीमाओं से परे लोगों को जोड़ती हैं। उन्होंने भारतीय सिनेमा को भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों और मित्रता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
फिल्म महोत्सव के दौरान भारत के सूचना, संचार और मनोरंजन (ICE) उद्योग की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर भी चर्चा हुई। पर्यटन, प्रौद्योगिकी, रचनात्मक उद्योगों और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी सिनेमा, कला और रचनात्मक उद्योगों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय सिनेमा की यह मजबूत मौजूदगी न केवल चीन में बॉलीवुड के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।









