अयोध्या के रामलला मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। जैसे-जैसे विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम और नई जानकारियां सामने आ रही हैं। अब जांच एजेंसियों का ध्यान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार मिश्र की ओर केंद्रित हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. अनिल मिश्र जल्द ही एसआईटी के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित इस विशेष जांच दल में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार शामिल हैं। टीम को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है।
जांच के दौरान मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से लंबी पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि टिन्नू, जो पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर के रूप में काम कर चुका है, उसने पूछताछ के दौरान डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं। इसके बाद जांच एजेंसियों के लिए डॉ. मिश्र से सीधे जानकारी लेना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना, उसकी निगरानी और कई प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्र के पास बताई जाती है। ऐसे में एसआईटी यह समझने का प्रयास कर रही है कि कथित गड़बड़ियों के दौरान निगरानी व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
गौरतलब है कि जांच शुरू होने से पहले डॉ. मिश्र आंखों के इलाज के लिए चेन्नई गए थे। अब उनके लौटने के बाद उनसे पूछताछ की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल इस मामले पर अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक नजरें टिकी हुई हैं और सभी को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।









