जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संसद के दोनों सदनों से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति और अधिसूचना के बाद यह कानून लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और फर्जीवाड़े से मुक्त बनाना है।
नए प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से दो वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप-मंडल दंडाधिकारी (SDM) की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं, यदि पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी होती है, तो संबंधित व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिलेगी। अनुमति देने से पहले सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने का मौजूदा नियम पहले की तरह लागू रहेगा। समय पर पंजीकरण बच्चों की शिक्षा, पहचान पत्र, सरकारी योजनाओं और अन्य कानूनी अधिकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि मृत्यु का सही रिकॉर्ड संपत्ति, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। सरकार का मानना है कि नए नियमों से फर्जी या गलत तरीके से होने वाले विलंबित पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी और देश में जन्म एवं मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड पहले से अधिक सटीक और भरोसेमंद बनेंगे।


