NEET-UG परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा आयोजित की जा रही परीक्षा को देखते हुए सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाओं पर रोक लगाई है। इस कदम पर सवाल उठाते हुए टेलीग्राम ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी का तर्क है कि सूचना साझा करने के लिए कई अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध हैं, फिर कार्रवाई केवल टेलीग्राम पर ही क्यों की गई।
टेलीग्राम के संस्थापक और CEO पावेल ड्यूरोव ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ दूरसंचार कंपनियां उनके प्लेटफॉर्म की इंटरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रही हैं। इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत सरकार किसी ऐप या वेबसाइट को किस आधार पर ब्लॉक कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A केंद्र सरकार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, ऐप या कंटेंट तक पहुंच सीमित करने का अधिकार देती है। हालांकि यह अधिकार कुछ विशेष परिस्थितियों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, देश की संप्रभुता, विदेशी संबंधों की सुरक्षा या अपराध रोकने की आवश्यकता।
इसके अलावा, आईटी (ब्लॉकिंग) नियम 2009 के तहत एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। संबंधित एजेंसियों की सिफारिश के बाद मामले की जांच होती है और आवश्यक होने पर ब्लॉकिंग आदेश जारी किया जाता है। आपात स्थितियों में सरकार तत्काल अस्थायी आदेश भी दे सकती है, जिसकी बाद में समीक्षा की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी पूरे ऐप पर प्रतिबंध लगाना एक बड़ा कदम होता है, इसलिए सरकार को यह साबित करना होता है कि यह फैसला परिस्थितियों के अनुरूप और आवश्यक था। इस मामले ने परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।









