आज के डिजिटल युग में ChatGPT, Meta AI और Google Gemini जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इन तकनीकों का गलत इस्तेमाल गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई प्लेटफॉर्म्स पर हथियार, विस्फोटक या किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि से जुड़ी जानकारी मांगना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सुरक्षा एजेंसियों की नजर में भी आ सकता है।
भारत में ऐसे मामलों को लेकर बेहद सख्त कानून लागू हैं। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या संदिग्ध इरादों से गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी खोजता है, तो उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस कानून में सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक शामिल हो सकता है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
तकनीकी प्लेटफॉर्म्स भी ऐसे कंटेंट को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हैं। यदि कोई यूजर लगातार प्रतिबंधित या खतरनाक जानकारी मांगने की कोशिश करता है, तो उसका अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड किया जा सकता है। कई AI सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने और उन्हें रोकने के लिए स्वचालित सुरक्षा फिल्टर का उपयोग करते हैं।
हालांकि, किसी भी ऑनलाइन गतिविधि में कानूनी कार्रवाई हमेशा व्यक्ति के इरादे (intent) और परिस्थिति पर निर्भर करती है। फिर भी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इंटरनेट और एआई का उपयोग केवल शिक्षा, शोध और सकारात्मक उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की कानूनी या सुरक्षा संबंधी परेशानी से बचा जा सके।









