Business National World

RBI का विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर फोकस, महंगाई और ग्रोथ को लेकर सतर्क रुख कायम

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति में संतुलित रुख अपनाते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है और ‘न्यूट्रल’ स्टांस जारी रखा है। इस बीच केंद्रीय बैंक ने विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए कई अहम उपायों की घोषणा की है। RBI के नए कदमों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा, FCNR-B डिपॉजिट को बढ़ावा और विदेशी निवेशकों तथा NRI के लिए आसान पहुंच शामिल है। इन उपायों से करीब 50 अरब डॉलर (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये) तक का विदेशी निवेश आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे लिक्विडिटी मजबूत होगी और रुपये को सपोर्ट मिलेगा।

साथ ही, ‘फुल्ली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) का विस्तार भी किया गया है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में अधिक निवेश का अवसर मिलेगा। इससे भारत के ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की संभावना भी मजबूत हुई है, जिससे अतिरिक्त 25 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। हालांकि, RBI ने महंगाई को लेकर चिंता भी जताई है। FY27 के लिए CPI इन्फ्लेशन अनुमान को 5.1 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है, जबकि आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिसके बाद कुछ नरमी आने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच RBI का यह कदम एक संतुलित रणनीति है, जो एक ओर विदेशी पूंजी आकर्षित करने और दूसरी ओर महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने पर केंद्रित है। बाजारों ने भी इस फैसले का सकारात्मक असर दिखाया है, जहां रुपये में सुधार और बॉन्ड यील्ड में मजबूती दर्ज की गई है।