शिक्षा मंत्रालय की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 रिपोर्ट 2024-25 में हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य की रैंकिंग में गिरावट दर्ज हुई है और अब हरियाणा देशभर में 14वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 8वें स्थान पर था। राज्य के कुल अंकों में भी कमी आई है। 2023-24 में हरियाणा को 591.4 अंक मिले थे, जो 2024-25 में घटकर 587.1 रह गए। इसी कारण राज्य को “प्रचेष्टा-3” श्रेणी में रखा गया है। यह दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की काफी गुंजाइश है।
रिपोर्ट में सबसे कमजोर पक्ष छात्रों की सीखने की गुणवत्ता (Learning Outcomes) को बताया गया है। इस श्रेणी में हरियाणा को 240 में से केवल 79.9 अंक मिले, जो बताता है कि बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धि अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा शिक्षा प्रशासन (Governance Process) में भी प्रदर्शन कमजोर रहा, जहां राज्य को 130 में से 47.1 अंक प्राप्त हुए। शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सुधार की जरूरत बताई गई है, हालांकि इसमें 100 में से 68.7 अंक मिले हैं।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक पहलू भी सामने आए हैं। स्कूलों तक पहुंच और नामांकन जैसे मानकों पर हरियाणा ने अच्छा प्रदर्शन किया है। एक्सेस श्रेणी में राज्य को 66.3 अंक मिले और इसे “उत्तम-1” ग्रेड प्राप्त हुआ। सामाजिक समानता और समावेशी शिक्षा के मामले में भी राज्य ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जहां उसे 226.2 अंक मिले। स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। रिपोर्ट के अनुसार PGI स्कोर 1000 अंकों पर आधारित होता है, जिसमें अलग-अलग स्तरों पर राज्यों की रैंकिंग तय की जाती है। हरियाणा के मौजूदा स्कोर में गिरावट से साफ है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना अब प्राथमिक चुनौती बन गई है।









