वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इससे पहले बीते शुक्रवार को दोनों ईंधनों की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ था, जो पिछले चार वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी वृद्धि मानी गई। लगातार दूसरी बढ़ोतरी के बाद देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें मई 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।
नई दिल्ली में पेट्रोल अब 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, ईरान संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा की आशंका से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे तेल महंगा हो गया।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, इसलिए कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डालना जरूरी हो गया। हालांकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनावों के कारण सरकार ने पहले दाम नहीं बढ़ाए। सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में भी हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से महंगाई पर असर पड़ सकता है और परिवहन सहित कई सेवाएं महंगी हो सकती हैं। वहीं केंद्र सरकार ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण को लेकर लोगों से संयम बरतने की अपील कर रही है।









