पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बाद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। दक्षिण 24 परगना जिले की चार विधानसभा सीटों के कुल 77 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान की मांग सामने आई है, जिसे भारतीय निर्वाचन आयोग गंभीरता से ले रहा है। इन बूथों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कथित छेड़छाड़, मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी शिकायतें दर्ज की गई हैं।
यह शिकायतें 29 अप्रैल को हुए मतदान के तुरंत बाद सामने आईं। आयोग को फाल्टा क्षेत्र से सबसे ज्यादा 32 शिकायतें मिलीं, जबकि डायमंड हार्बर से 29, मगराहाट से 13 और बज-बज से 3 शिकायतें दर्ज की गईं। आमतौर पर इस तरह की मांगें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों या मतदान एजेंटों द्वारा की जाती हैं, जो मतदान में अनियमितताओं का हवाला देते हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शिकायतों में EVM के साथ छेड़छाड़, मशीनों पर संदिग्ध वस्तुओं का इस्तेमाल और निगरानी कैमरों को बाधित करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए आयोग कोई भी जोखिम उठाने के पक्ष में नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर खुद स्थिति का आकलन करें। गुप्ता विभिन्न बूथों पर जाकर जांच कर रहे हैं और अन्य पर्यवेक्षकों से भी बातचीत कर रहे हैं। उनसे विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाए। जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जा सकती है। इस बीच मगराहाट पश्चिम से एक गंभीर आरोप भी सामने आया है, जहां मतदाताओं पर नजर रखने के लिए कथित तौर पर गुप्त कैमरों के इस्तेमाल की बात कही गई है।









