1 मई 2026 की शुरुआत के साथ ही आम उपभोक्ताओं की रसोई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। एलपीजी सिलेंडर से जुड़े नियमों, कीमतों और डिलीवरी प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने की तैयारी है। वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण भारत की तेल विपणन कंपनियां नई रणनीति अपना रही हैं। फरवरी के बाद से ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत चूंकि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 1 मई को तेल कंपनियां नए एलपीजी दाम जारी कर सकती हैं और इस बार कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कई बार वृद्धि देखी जा चुकी है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ा है। इसके साथ ही बुकिंग व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां अब सिलेंडर बुकिंग के बीच न्यूनतम समय सीमा लागू कर सकती हैं। प्रस्ताव के अनुसार, उपभोक्ता नया सिलेंडर कम से कम 25 दिन बाद ही बुक कर पाएंगे, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए यह अंतर 45 दिन तक हो सकता है। इसका उद्देश्य गैस की कालाबाजारी रोकना और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, जिसे डिलीवरी बॉय को बताना अनिवार्य होगा। बिना कोड के डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाएगी। इसके अलावा, सभी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी को भी अनिवार्य किया जा रहा है। समय पर केवाईसी अपडेट न होने की स्थिति में गैस बुकिंग या सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि सब्सिडी केवल पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचे और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़े।









