माओवाद विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर डिवीजन के 47 माओवादियों ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हैदराबाद में आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। डीजीपी शिवधर रेड्डी की मौजूदगी में हुए इस आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने कब्जे में मौजूद 32 हथियार भी पुलिस को सौंप दिए। अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी छत्तीसगढ़ के हैं और इनमें तेलंगाना का कोई कैडर शामिल नहीं है। इस बड़े आत्मसमर्पण को माओवादी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।
सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों के लिए 1.20 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत उन्हें केंद्र सरकार की विभिन्न पुनर्वास योजनाओं, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य लाभों का भी फायदा मिलेगा। डीजीपी ने कहा कि सरकार उन सभी लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो हिंसा छोड़कर समाज में वापस लौटना चाहते हैं। उन्होंने विशेष खुफिया शाखा और पुलिस टीमों के समन्वित प्रयासों की भी सराहना की। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक तेलंगाना में 260 से अधिक भूमिगत माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि केवल चार माओवादी कैडर अभी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालिया आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने और शांति स्थापना की दिशा में एक अहम कदम मान रही हैं।









