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अब मोबाइल ऐप से होगी जनगणना, 2027 में आएगा भारत का पहला डिजिटल सेन्सस

भारत 2027 में अपनी अगली जनगणना के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाने जा रहा है। यह जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। इसे अब तक की सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से उन्नत जनगणना माना जा रहा है, जिसमें मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

जनगणना किसी भी देश की जनसंख्या, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति को समझने का सबसे महत्वपूर्ण साधन होती है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े सरकार को नीति निर्माण, विकास योजनाओं और संसाधनों के उचित वितरण में मदद करते हैं। भारत में जनगणना की परंपरा प्राचीन काल से रही है, जिसका उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र और अकबरकालीन आईन-ए-अकबरी में भी मिलता है। आधुनिक भारत में पहली व्यवस्थित जनगणना 1881 में हुई थी।

2027 की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः डिजिटल स्वरूप होगा। इसमें मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह प्रणाली, रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल, तथा नागरिकों के लिए स्व-गणना (self-enumeration) जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी। इसके साथ ही भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करके क्षेत्रीय डेटा को अधिक सटीक बनाया जाएगा।

इस बार जनसंख्या गणना के दौरान व्यापक जाति-आधारित डेटा भी एकत्र किया जाएगा, जिससे सामाजिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का उद्देश्य इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा संग्रह को तेज, सुरक्षित और अधिक सटीक बनाना है। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना स्थगित हो गई थी। ऐसे में 2027 की जनगणना न केवल समयानुसार महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की डेटा-संचालित शासन प्रणाली को नई दिशा देने वाली साबित होगी।