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ड्रोन खतरे के बीच भारत की नई रणनीति, एयर डिफेंस में जुड़ सकती है अहम सुरक्षा परत

भारत अपनी हवाई सुरक्षा को नए दौर की चुनौतियों के अनुरूप ढालने में तेजी से जुटा है। हाल के वैश्विक संघर्षों, खासकर मिडिल ईस्ट में हुए ड्रोन हमलों ने यह साफ कर दिया है कि पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम अब अकेले पर्याप्त नहीं हैं। छोटे, सस्ते और झुंड में हमला करने वाले ड्रोन बड़े और महंगे सैन्य सिस्टम के लिए गंभीर खतरा बनकर उभरे हैं।

इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए रूस ने भारत को एक उन्नत शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश की है। यह सिस्टम मोबाइल है और मिसाइल के साथ-साथ ऑटोमैटिक गन का भी उपयोग करता है, जिससे यह नजदीकी खतरों को तुरंत निष्क्रिय करने में सक्षम बनता है। इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हथियारों को भी प्रभावी ढंग से रोक सकता है।

भारत के मौजूदा लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम बड़े लक्ष्यों जैसे फाइटर जेट और मिसाइल को रोकने में सक्षम हैं, लेकिन छोटे ड्रोन या लो-फ्लाइंग हथियारों से बचाव के लिए अतिरिक्त सुरक्षा परत जरूरी है। यही नई प्रणाली अंतिम सुरक्षा घेरा बनकर काम कर सकती है और पहले स्तर को पार कर चुके खतरों को खत्म कर सकती है।

अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करेगा। इससे न केवल सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि रडार और कमांड सेंटर भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहेंगे। बदलते युद्ध परिदृश्य में यह कदम भारत की रणनीतिक तैयारी को एक नई दिशा दे सकता है।