भारत ने आज से जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत कर दी है, जो देश की 16वीं और आज़ादी के बाद की आठवीं जनगणना होगी। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल और कागज़-रहित होगी, जिसमें स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा संग्रहित किया जाएगा। पहले चरण में घरों की स्थिति, घरेलू सुविधाएँ, संपत्ति, बिजली, पानी, साफ-सफाई और इंटरनेट जैसी सुविधाओं की जानकारी एकत्र की जाएगी। नागरिक स्वयं भी 16 भाषाओं में उपलब्ध सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के ज़रिए अपने घर और परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।
राज्यों में चरणवार कार्यवाही की जा रही है। अंडमान-निकोबार, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 16 अप्रैल से 15 मई तक घरों की गिनती होगी। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 1 मई से 30 मई तक यह प्रक्रिया होगी। दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में शुरू होगा। बर्फ़ से ढके क्षेत्रों में यह काम सितंबर 2026 से ही शुरू किया जाएगा।
इस विशाल अभियान में 30 लाख से अधिक एन्यूमेरेटर और अधिकारियों को तैनात किया जाएगा, और इसके लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंज़ूर किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल टूल्स, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन इस प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज़ और सटीक बनाने में मदद करेंगे। यह जनगणना भारत में शासन और योजना के तरीकों में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है।









