यूडीआईएसई+ 2024-25 रिपोर्ट ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की एक अहम तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उसी गति से बुनियादी ढांचे और संसाधनों का विस्तार नहीं हो पाया है। इससे स्कूलों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
औसतन एक स्कूल में करीब 808 छात्र नामांकित हैं, जो अधिक भीड़ की स्थिति को दर्शाता है। कुल 5,556 स्कूलों में से 2,681 सरकारी स्कूल हैं, जिससे यह साफ होता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी सरकारी संस्थानों पर निर्भर हैं। शिक्षकों की कुल संख्या 1,61,958 है और छात्र-शिक्षक अनुपात 28:1 बना हुआ है, जो पिछले समय से लगभग स्थिर है। विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों की संख्या अलग-अलग है—प्रारंभिक स्तर पर 26,560, मध्य स्तर पर 11,564 और माध्यमिक स्तर पर 1,23,834 शिक्षक कार्यरत हैं। हालांकि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां केवल एक ही शिक्षक है, जिससे पढ़ाई और प्रबंधन प्रभावित होता है।
सुविधाओं की बात करें तो अधिकांश स्कूलों में शौचालय उपलब्ध हैं, लेकिन डिजिटल पुस्तकालय केवल 430 स्कूलों तक सीमित हैं। वहीं 1,844 स्कूलों में सौर ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए 2026-27 तक 50 नए स्कूल और 8,000 अतिरिक्त कक्षाएं बनाने का लक्ष्य तय किया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विभिन्न स्तरों पर छात्राओं की भागीदारी लड़कों से अधिक है, जो शिक्षा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।









