ईरान-इजराइल तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हालांकि इस फैसले के सामने आने के बाद भारत की राजनीति में बहस तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी दूसरे देश का भारत को इस तरह अनुमति देना हमारी स्वतंत्रता और संप्रभुता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने लिखा कि भारत को अपनी ऊर्जा नीति खुद तय करनी चाहिए और यह स्थिति चिंताजनक है कि अमेरिका से अनुमति की बात सामने आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी पहले से ही सरकार को सचेत करते रहे हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का यह रवैया दबाव बनाने की राजनीति जैसा लगता है। वहीं प्रियांक खड़गे ने सवाल उठाया कि आखिर अमेरिका भारत को तेल खरीदने की अनुमति देने वाला कौन होता है और सरकार इस पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं दिखा रही है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की मंजूरी का इंतजार करना पड़े, तो यह सरकार की कमजोर कूटनीति को दर्शाता है। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऊर्जा रणनीति के तहत भारत को यह अस्थायी राहत दी गई है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने ईरान पर वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।









