केरल ने स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए भारत के टॉप 100 सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राज्य के स्थानीय स्वशासन विभाग ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया है। केरल के मंत्री M B Rajesh ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में स्वच्छता परियोजनाओं पर कुल 1591.28 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि केरल सरकार का प्रमुख लक्ष्य ‘मलिन्य मुक्त नवकेरलम’ (कचरा मुक्त नया केरल) अभियान को सफल बनाना था, जिसमें राज्य काफी हद तक सफल रहा है। इस अभियान के तहत स्थानीय निकायों के माध्यम से कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत किया गया और शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए। राज्य के कुल आठ शहर देश के सबसे स्वच्छ 100 शहरों की सूची में शामिल हुए हैं, जो केरल की स्वच्छता नीति की सफलता को दर्शाता है।
स्वच्छता मिशन के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी पूरे किए गए हैं। ब्रह्मपुरम में पहला कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट पूरा हो चुका है, जबकि कोझिकोड, कोल्लम, त्रिशूर और चांगनास्सेरी में बायोगैस संयंत्रों का काम प्रगति पर है। इसके अलावा ब्रह्मपुरम सहित 59 कचरा डंप स्थलों में से 24 को साफ किया जा चुका है और लगभग 70 एकड़ भूमि को पुनः उपयोग योग्य बनाया गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक की राजधानी Bengaluru में भी कचरा प्रबंधन को लेकर नई योजना सामने आई है। उपमुख्यमंत्री D K Shivakumar ने घोषणा की है कि सरकार पहाड़ी और वन क्षेत्रों के पास कचरा निपटान के लिए किसानों से 100 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि कचरा निपटान की समस्या का स्थायी समाधान निकालना सरकार की प्राथमिकता है।
इसके साथ ही उन्होंने बेंगलुरु में चल रही 5000 करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाओं को मानसून से पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शहर से 40 किलोमीटर के दायरे में जमीन देने के इच्छुक किसानों और बिल्डरों को भी प्रस्ताव देने के लिए आमंत्रित किया है। कुल मिलाकर, केरल की स्वच्छता उपलब्धि राज्य की पर्यावरण नीति और कचरा प्रबंधन रणनीति की सफलता को दर्शाती है, जबकि अन्य राज्यों में भी इसी तरह के समाधान तलाशे जा रहे हैं।









