राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कभी भी पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का पिछड़ना केंद्र की नीतियों के कारण नहीं, बल्कि टीएमसी सरकार की अपनी नाकामियों और अनियमितताओं का परिणाम है।
सीतारमण ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बंगाल से कई उद्योग पलायन कर गए हैं। उनके अनुसार, 1 अप्रैल 2011 से 30 सितंबर 2025 के बीच राज्य से 448 सूचीबद्ध और 6,447 गैर-सूचीबद्ध कंपनियां बाहर चली गईं। उन्होंने यह भी कहा कि कभी 10% तक पहुंची पश्चिम बंगाल की जीडीपी वृद्धि दर घटकर करीब 3% तक सिमट गई है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति के गिरने का स्पष्ट संकेत है।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने राज्य को 1.75 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी क्षतिपूर्ति और अन्य फंड न मिलने का आरोप लगाया था। वित्त मंत्री ने जवाब दिया कि केंद्र ने किसी भी वैध मांग को रोका नहीं, बल्कि जिन मामलों में नियमों का पालन नहीं हुआ, वहां जांच और कार्रवाई आवश्यक थी।
मनरेगा भुगतान पर उठे सवालों पर सीतारमण ने कहा कि मार्च 2022 से राज्य में पाई गई अनियमितताओं के कारण राशि रोकी गई। जुलाई 2025 में खुद राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि चार जिलों से 4.81 करोड़ रुपये की वसूली की गई और कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत योजना से 2019 में बाहर निकलने का फैसला बंगाल सरकार ने स्वयं लिया था, जिससे सीधे आम लोगों को नुकसान पहुंचा। वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट टीएमसी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर अपना विरोध दर्ज कराया।









