अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में H-1B वीजा धारकों को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण सुर्खियों में हैं। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को कुशल विदेशी कामगारों की आवश्यकता है, यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि कई अमेरिकी “कुछ विशेष कौशल” नहीं रखते और उन्हें सीखने की जरूरत है। इस बयान के बाद कई लोगों को लगा कि ट्रंप शायद वीजा नीति पर नरमी की ओर बढ़ रहे हैं।
लेकिन अब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्थिति साफ करते हुए एक बिल्कुल अलग रुख पेश किया है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में बेसेंट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की नीति का उद्देश्य विदेशी विशेषज्ञों को अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाना है—न कि उनकी जगह स्थायी रूप से विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करना। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसे पेशेवर चाहती है जिनके पास 5 से 7 वर्षों का अनुभव हो। ये विशेषज्ञ अमेरिका में आकर स्थानीय लोगों को आधुनिक तकनीकों और प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देंगे और फिर अपने देश लौट जाएंगे।
बेसेंट ने स्वीकार किया कि अमेरिका में कुछ उद्योगों, जैसे जहाज निर्माण और सेमीकंडक्टर निर्माण, में प्रशिक्षित अमेरिकी कर्मियों की कमी है। ऐसे कामों के लिए विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन जिम्मेदारियों को अमेरिकी कर्मचारी ही संभालेंगे। इस बयान के बाद H-1B वीजा धारकों में फिर अनिश्चितता बढ़ गई है।









