लेह में 24 अगस्त को भड़की हिंसा के बाद लद्दाख में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. हिंसा के तीसरे दिन भी क्षेत्र में कर्फ्यू जारी है और स्कूल-कॉलेज शनिवार तक बंद कर दिए गए हैं. हिंसा में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक युवक घायल हुए हैं. इस बीच लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि घायलों में नेपाल और कश्मीर के डोडा क्षेत्र के युवक भी शामिल हैं. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य लद्दाख में अशांति फैलाना है.
लेह पुलिस के अनुसार, सात घायल नेपाली नागरिक हैं और कुछ कश्मीरी युवकों का कोई स्थानीय रिकॉर्ड नहीं मिला है. इसके चलते पुलिस अब हिंसा में विदेशी एंगल की जांच कर रही है. वहीं, समाजसेवी सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि लद्दाख की असली समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए सरकार उन्हें हिंसा का दोषी ठहराना चाहती है. गृह मंत्रालय ने वांगचुक की संस्था SECMOL का विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है और सीबीआई को जांच का आदेश दिया है. प्रारंभिक रिपोर्ट में फंडिंग के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं. विरोध प्रदर्शन की शुरुआत लद्दाख को पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुई थी.









