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अल नीनो का खतरा बढ़ा, कमजोर मानसून और कम बारिश की आशंका से भारत में चिंता

भारत में मानसून आमतौर पर मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की लगभग 80 प्रतिशत संभावना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न के साथ-साथ भारत के मानसून पर भी गंभीर असर डाल सकता है। अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है, जो नौ से बारह महीने तक बनी रह सकती है। यह घटना दुनिया भर में तापमान और वर्षा के संतुलन को बिगाड़ देती है और चरम मौसम घटनाओं की संभावना बढ़ा देती है।

भारत में अल नीनो का प्रभाव अक्सर कमजोर मानसून और अधिक गर्मी के रूप में देखा जाता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यह अल नीनो मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। WMO के अनुसार, यह प्रभाव नवंबर तक जारी रहने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अल नीनो पहले से गर्म होती दुनिया में और अधिक चुनौतियां बढ़ाएगा, जिससे सूखा, भारी बारिश और हीटवेव जैसी घटनाएं तेज हो सकती हैं। उन्होंने इसे जलवायु संकट के प्रति गंभीर चेतावनी मानते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। WMO के पूर्वानुमान के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच दक्षिण एशिया में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, खासकर भारत के कई हिस्सों में मानसून कमजोर रहने की आशंका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में बढ़ता समुद्री तापमान इस बदलाव का मुख्य कारण है, जो वैश्विक जलवायु प्रणाली को प्रभावित कर रहा है।