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देश के औद्योगिक विकास में तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र की बड़ी भूमिका, 2.10 करोड़ लोगों को मिला रोजगार

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र प्रमुख औद्योगिक राज्यों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कारखानों की संख्या के लिहाज से तमिलनाडु पहले स्थान पर है, जबकि औद्योगिक उत्पादन में गुजरात सबसे आगे है। वहीं, राष्ट्रीय आय में योगदान और मूल्य संवर्धन के मामले में महाराष्ट्र की अहम भूमिका है। सांख्यिकी मंत्रालय की वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट में देश के औद्योगिक क्षेत्र की यह तस्वीर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 2.18 लाख कारखाने संचालित हैं, जिनमें करीब 2.10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इस आधार पर एक कारखाने में औसतन 96 कर्मचारी काम करते हैं। इन कारखानों में औसतन 2,339 लाख रुपये की स्थायी पूंजी निवेशित है। वहीं, प्रत्येक कारखाना औसतन 7,561 लाख रुपये के सामान और सेवाओं का उत्पादन करता है। इससे करीब 1,052 लाख रुपये का शुद्ध मूल्य संवर्धन होता है।

कर्मचारियों को मिला 8.03 लाख करोड़ रुपये का वेतन

औद्योगिक इकाइयों ने वर्ष के दौरान अपने कर्मचारियों को कुल 8.03 लाख करोड़ रुपये का पारिश्रमिक दिया। रिपोर्ट बताती है कि संख्या के लिहाज से छोटे कारखाने अधिक हैं, लेकिन देश की कुल स्थायी पूंजी का 79.59 प्रतिशत हिस्सा बड़े उद्योगों के पास है। इससे बड़े उद्योगों की निवेश क्षमता और आर्थिक महत्व का पता चलता है।

खाद्य और रासायनिक उद्योग का दबदबा

प्रमुख उद्योगों की बात करें तो उत्तर प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन में खाद्य उत्पाद क्षेत्र की हिस्सेदारी 22.02 प्रतिशत है। देश के खाद्य उत्पाद उत्पादन में उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की संयुक्त भागीदारी 37.61 प्रतिशत है। वहीं, रसायन एवं रासायनिक उत्पादों के उत्पादन में गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 56.31 प्रतिशत है। रोजगार उपलब्ध कराने में खाद्य उद्योग 11.24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद कपड़ा उद्योग 8.37 प्रतिशत और बुनियादी धातु उद्योग 7.54 प्रतिशत योगदान देते हैं।

जीवीए में धातु उद्योग सबसे आगे

सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में बुनियादी धातु उद्योग की हिस्सेदारी 11.58 प्रतिशत है। मोटर वाहन उद्योग 9.54 प्रतिशत और रासायनिक उद्योग 8.45 प्रतिशत योगदान देता है। फार्मास्यूटिकल और खाद्य उद्योग की हिस्सेदारी क्रमशः 8.08 और 7.87 प्रतिशत है। इन छह उद्योगों का संयुक्त योगदान देश के कुल जीवीए में 52.41 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे उद्योगों को सस्ता कर्ज, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।