फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। सितंबर में पेरिस के उत्तरी हिस्से के एक स्कूल से शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे कई शहरों तक फैल गया। छात्र और शिक्षक स्कूलों में कर्मचारियों की कमी, बढ़ती भीड़, संसाधनों की कमी और जर्जर इमारतों जैसी समस्याओं को लेकर सरकार से सुधार की मांग कर रहे हैं। शुरुआत में प्रदर्शन शिक्षकों के समर्थन और स्कूलों में अतिरिक्त स्टाफ की मांग तक सीमित था। पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में विरोध के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था भी की थी। इसके बावजूद छात्रों की मांगें दूसरे स्कूलों में भी उठने लगीं और आंदोलन तेजी से फैल गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध के दौरान करीब 400 स्कूल बंद रहे, जबकि 100 से अधिक हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। कई जगह छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद किए, बैरिकेड लगाए और कूड़ेदानों में आग लगाई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में छात्र, शिक्षक और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। कुछ घटनाओं में छात्रों को गंभीर चोटें भी आई हैं। फ्रांस के न्याय मंत्रालय के अनुसार, हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की बताई जा रही है। सरकार ने हिंसा के लिए कट्टरपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि विपक्ष ने इस आरोप को खारिज किया है।
इस आंदोलन ने फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था की पुरानी समस्याओं को फिर चर्चा में ला दिया है। भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, शिक्षकों की कमी और अपर्याप्त सुविधाओं को लेकर छात्र लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं। सरकार के सामने चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि देश पहले से महंगाई, बढ़ते सरकारी कर्ज, पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च तथा रक्षा बजट के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में छात्रों का बढ़ता आंदोलन सरकार के लिए एक नई मुश्किल बन गया है।


